सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा का सिलेबस (UPSC preliminary exam syllabus)

सिविल सेवा परीक्षा हेतु आयु सीमा एवं प्रयास संख्या

 सिविल सेवा परीक्षा का पैटर्न

परीक्षा के चरण (Stages of Examination) :

यह परीक्षा तीन चरणों में आयोजित की जाती है


प्रारम्भिक परीक्षा

प्रथम चरण की इस प्रक्रिया में दो प्रश्नपत्र होते हैं, प्रथम प्रश्नपत्र सामान्य अध्ययन, वस्तुनिष्ठ प्रकार का होता है, जिसकी  समयावधि 2 घंटे व पूर्णांक 200 अंक होता है। बदले हुए परीक्षा स्वरूप के अनुसार इसी प्रश्नपत्र में प्राप्त अंकों के आधार पर मैरिट का निर्माण किया जाता है, जिसके आधार पर उत्तीर्ण अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा हेतु पात्र होते हैं। 

प्रारम्भिक परीक्षा के अंतर्गत द्वितीय प्रश्नपत्र सी-सैट (CSAT) भी वस्तुनिष्ठ प्रकार का होता है जिसकी समयावधि 2 घंटे व पूर्णांक 200 अंक होता है। बदले हुए परीक्षा स्वरूप के अनुसार इस प्रश्नपत्र को 33% अंकों के साथ मात्र उत्तीर्ण करना आवश्यक है, अर्थात् इस प्रश्नपत्र में प्राप्त अंकों को अब मेरिट में नहीं जोड़ा जाता है।
इस प्रकार यह एक सुविधा तो हुई है परंतु इसने एक नवीन समस्या को जन्म दिया है, छात्र इसकी तैयारी समुचित तरीक़े से नहीं करते व सामान्य अध्ययन में अच्छे अंक प्राप्त करने के बाद भी वे मुख्य परीक्षा हेतु उत्तीर्ण नहीं कर पाते हैं।


प्रारम्भिक परीक्षा का पाठ्यक्रम


प्रश्न पत्र – I : सामान्य अध्ययन (General Studies)

राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएँ।

भारत का इतिहास और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन ।

भारत एवं विश्व भूगोल – भारत एवं विश्व का प्राकृतिक, सामाजिक, आर्थिक भूगोल।

भारतीय राजतंत्र और शासन – संविधान, राजनैतिक प्रणाली, पंचायती राज, लोक नीति, अधिकारों सम्बन्धी मुद्दे आदि ।

आर्थिक और सामाजिक विकास – सतत विकास, गरीबी, समावेशन, जन सांख्यिकी, सामाजिक क्षेत्र में की गयी पहल आदि।

पर्यावरणीय पारिस्थितिक जैव विविधता और मौसम परिवर्तन सम्बन्धी सामान्य मुद्दे, जिनके लिए विषयगत विशेषज्ञता आवश्यक नहीं है ।
सामान्य विज्ञान ।

प्रश्न पत्र- II : सी-सैट (C-SAT)

बोध गम्यता (Comprehension)

संचार कौशल सहित अंतर – वैयक्तिक कौशल (Interpersonal skills including Communication skills)

तार्किक कौशल एवं विश्लेषणात्मक क्षमता (Logical reasoning and analytical Ability)

निर्णय लेना और समस्या समाधान (Decision-making and problem solving)

सामान्य मानसिक योग्यता (General mental ability)

आधारभूत संख्यनन (Basic numeracy) (संख्याएँ और उनके सम्बंध, विस्तार क्रम आदि) (दसवीं कक्षा का स्तर), आँकड़ों का निर्वचन (Data interpretation ) (चार्ट, ग्राफ़ तालिका, आँकड़ों की पर्याप्तता आदि – दसवीं कक्षा का स्तर)

By - lbsnaa jeet 


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

बहावी आंदोलन 1820 से 1870

बहावी आंदोलन 1820 से 1870 के बीच हुआ हुआ आंदोलन क्षेत्र - पंजाब और बंगाल  आंदोलन के संस्थापक - सैयद अहमद बरेलवी थे। जिन पर अब्दुल वहाब का प्रभाव था तथा संत शाह वली उल्ला का महत्वपूर्ण प्रभाव नजर आता है। आंदोलन का उद्देश्य - धार्मिक उद्देश्य - आंदोलन का उद्देश्य इस्लाम धर्म में सुधार करना था अर्थात इस्लाम धर्म की बुराइयों को समाप्त कर मूल रूप में इस्लाम की स्थापना करना चाहते थे। राजनीतिक उद्देश्य - भारत दारुल हर्ब( काफिरों का देश ) है इसे इस्लाम हब ( इस्लाम देश ) में बदलना है। बंगाल तथा पंजाब से क्रमशः सिक्ख और अंग्रेजों का शासन निकाल फेंक मुसलमानों का शासन स्थापित करना चाहते थे। सैयद अहमद बरेलवी 1820 के बाद रुहेलखंड क्षेत्र में अपने विचारधारा का प्रचार प्रसार करने लगे। पटना में केंद्र स्थापित किया तथा कार्यकारी कार्यालय सीथना ( वर्तमान खैबर पख्तून ) बनाया गया जिसका संचालन पटना से होगा। 1830 में पेशावर पर कब्जा कर लिया गया इस समय पेशावर के शासक राजा रणजीत सिंह थे। 1831 में सैयद अहमद बरेलवी का सामना रणजीत सिंह की सीना से बालाकोट में हुआ जिसे बालाकोट युद्ध के नाम से जा...

लसोड़िया आंदोलन

लसोड़िया आंदोलन लसोड़िया आंदोलन” का क्षेत्र :- राजस्थान नेतृत्व करता :- (1).गोविंद गिरि, (2)सुर्जी भगत 19वीं सदी के उत्तरार्ध में सुर्जी भगत एवं गोविंद गिरि नामक समाज सुधारकों ने राजस्थान की मेवाड़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, सिरोही, पाली इत्यादि रियासतों में बसी भील जनजाति में सामाजिक सुधारों के प्रयास किए। गोविंद गिरि ने भीलों को संगठित करने के उद्देश्य से 1883 ई . में ‘सम्प सभा' की स्थापना की थी। गोविंद गिरि को लसोड़िया आंदोलन का प्रवर्तक माना जाता है। “मानगढ़ नरसंहार :- मानगढ़ नरसंहार की घटना राजस्थान से संबंधित है। मानगढ़ नरसंहार 17 नवम्बर वर्ष 1913 का है।मानगढ़ नरसंहार मै भील जनजाति के लगभग 1500 से अधिक लोग मारे गए थे इसे आदिवासी जलियाँवाला के नाम से जाना जाता है।  __________________________________________ महत्वपूर्ण प्रश्न :-   1. मेवाड़, बागड़ और पास के क्षेत्रों के भीलों में सामाजिक सुधार के िलए 'लसोड़िया आंदोलन' का सूत्रपात किसने किया? (a) भागीरथ माँझी (b) गोविंद गिरि (c) सिदो मूर्मू (d) सुरेंद्र साई उत्तर (b) गोविंद गिरि 2. “लसोड़िया आंदोलन” का क्षेत्र था - (...

खिलजी वंश

कैकूबाद कैकूबाद तुर्क वंश का दिल्ली का सुलतान था। वह गयासुद्दीन बलबन का पौत्र था जो उसकी मृत्यु के पश्चात् 1286 ई. में 18 वर्ष की अवस्था में दिल्ली का सुलतान बना। विलासी होने के कारण वह शीघ्र ही दरबार के षड्यंत्रों का शिकार हुआ। 1288 ई. में जलालुद्दीन खिलजी ने उसकी हत्या कर गद्दी पर अधिकार कर लिया। खिलजी वंश(1290 ई.- 1320 ई.) : इतिहासकार ‘निज़ामुद्दीन अहमद’ ने ख़िलजी को चंगेज़ ख़ाँ का दामाद और कुलीन ख़ाँ का वंशज, ‘बरनी’ ने उसे तुर्कों से अलग एवं ‘फ़खरुद्दीन’ ने ख़िलजियों को तुर्कों की 64 जातियों में से एक बताया है। फ़खरुद्दीन के मत का अधिकांश विद्वानों ने समर्थन किया है। ‘फरुखदीन लिखित “तारीख-ए-फखरूदीन मुबारकशाही’ के अनुसार खिलजी वंश के सुल्तानों के पूर्वज तुर्की थे। अफगानिस्तान के हेलमन्द नदी की घाटी के प्रदेश को ‘खलजी’ के नाम से पुकारा जाता था। जो जातियां उस प्रदेश में बस गई उन्हें खलजी पुकारा जाने लगा। जलालुद्दीन के वंशज 200 वर्षों से भी अधिक उस प्रदेश में रहे उनके रहन सहन, रीति-रिवाज अफगानों की भांति हो गये और भारत में उन्हें अफगान समझा जाने लगा परन्तु खिलजी वंश...