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लसोड़िया आंदोलन

लसोड़िया आंदोलन लसोड़िया आंदोलन” का क्षेत्र :- राजस्थान नेतृत्व करता :- (1).गोविंद गिरि, (2)सुर्जी भगत 19वीं सदी के उत्तरार्ध में सुर्जी भगत एवं गोविंद गिरि नामक समाज सुधारकों ने राजस्थान की मेवाड़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, सिरोही, पाली इत्यादि रियासतों में बसी भील जनजाति में सामाजिक सुधारों के प्रयास किए। गोविंद गिरि ने भीलों को संगठित करने के उद्देश्य से 1883 ई . में ‘सम्प सभा' की स्थापना की थी। गोविंद गिरि को लसोड़िया आंदोलन का प्रवर्तक माना जाता है। “मानगढ़ नरसंहार :- मानगढ़ नरसंहार की घटना राजस्थान से संबंधित है। मानगढ़ नरसंहार 17 नवम्बर वर्ष 1913 का है।मानगढ़ नरसंहार मै भील जनजाति के लगभग 1500 से अधिक लोग मारे गए थे इसे आदिवासी जलियाँवाला के नाम से जाना जाता है।  __________________________________________ महत्वपूर्ण प्रश्न :-   1. मेवाड़, बागड़ और पास के क्षेत्रों के भीलों में सामाजिक सुधार के िलए 'लसोड़िया आंदोलन' का सूत्रपात किसने किया? (a) भागीरथ माँझी (b) गोविंद गिरि (c) सिदो मूर्मू (d) सुरेंद्र साई उत्तर (b) गोविंद गिरि 2. “लसोड़िया आंदोलन” का क्षेत्र था - (...
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भारत में मुस्लिम आक्रमण का पूरा दौर

“भारत  में  मुसलिम आक्र मण ” पैगंबर हजरत मोहम्मद पैगंबर मोहम्मद का जन्म अरब के रेगिस्तान के शहर मक्का में 570 ईस्वी में हुआ था। पैगंबर साहब के जन्म से पहले ही उनके पिता का निधन हो चुका था। जब वह 6 वर्ष के थे तो उनकी मां की भी मृत्यु हो गई। मां के निधन के बाद पैगंबर मोहम्मद अपने चाचा अबूतालिब और दादा अबूमुतालिब के साथ रहने लगे। इनके पिता का नाम अब्दुल्लाह और माता का नाम बीबी अमीना था। पैगंबर मोहम्मद मूर्ति पूजा या किसी भी चित्र की पूजा के खिलाफ थे। यही वजह है कि उनकी कहीं भी तस्वीर या मूर्ति नहीं मिलती है। इस्लाम में मूर्ति पूजन की मनाही है। पैगंबर मोहम्मद इस्लाम के आखिरी पैगंबर हैं। कुरान के मुताबिक, एक रात जब वह पर्वत की एक गुफा में ध्यान कर रहे थे तो फरिश्ते जिब्राइल आए और उन्हें कुरान की शिक्षा दी। अल्लाह का संदेश मानकर पैगंबर मोहम्मद जिंदगी भर इसे दोहराते रहे। उनके शब्दों को याद कर लिया गया और संग्रहित कर लिया गया। पैगंबर का विश्वास था कि अल्लाह ने उन्हें अपना संदेशवाहक चुना है इसलिए वह दूसरों को भी अल्लाह का संदेश देने लगे। चूंकि ख़दीजा पहली शख्स थीं, जिन्हें मोहम्मद साह...

खिलजी वंश

कैकूबाद कैकूबाद तुर्क वंश का दिल्ली का सुलतान था। वह गयासुद्दीन बलबन का पौत्र था जो उसकी मृत्यु के पश्चात् 1286 ई. में 18 वर्ष की अवस्था में दिल्ली का सुलतान बना। विलासी होने के कारण वह शीघ्र ही दरबार के षड्यंत्रों का शिकार हुआ। 1288 ई. में जलालुद्दीन खिलजी ने उसकी हत्या कर गद्दी पर अधिकार कर लिया। खिलजी वंश(1290 ई.- 1320 ई.) : इतिहासकार ‘निज़ामुद्दीन अहमद’ ने ख़िलजी को चंगेज़ ख़ाँ का दामाद और कुलीन ख़ाँ का वंशज, ‘बरनी’ ने उसे तुर्कों से अलग एवं ‘फ़खरुद्दीन’ ने ख़िलजियों को तुर्कों की 64 जातियों में से एक बताया है। फ़खरुद्दीन के मत का अधिकांश विद्वानों ने समर्थन किया है। ‘फरुखदीन लिखित “तारीख-ए-फखरूदीन मुबारकशाही’ के अनुसार खिलजी वंश के सुल्तानों के पूर्वज तुर्की थे। अफगानिस्तान के हेलमन्द नदी की घाटी के प्रदेश को ‘खलजी’ के नाम से पुकारा जाता था। जो जातियां उस प्रदेश में बस गई उन्हें खलजी पुकारा जाने लगा। जलालुद्दीन के वंशज 200 वर्षों से भी अधिक उस प्रदेश में रहे उनके रहन सहन, रीति-रिवाज अफगानों की भांति हो गये और भारत में उन्हें अफगान समझा जाने लगा परन्तु खिलजी वंश...

गयासुद्दीन तुगलक

गयासुद्दीन तुगलक अलाउद्दीन के सेनापतियों में गयासुद्दीन तुगलक या गाजी मलिक तुगलक वंश का प्रथम शासक था। उसने तुगलक वंश की स्थापना की। गयासुद्दीन तुगलक अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में कई महत्वपूर्ण अभियानों का अध्यक्ष था तथा उसे दीपालपुर का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। अनेक अवसरों पर उसने मंगोलों के विरुद्ध युद्ध किया, उन्हें भारत से बाहर खदेड़ा, इसलिए वह ‘मलिक-उल-गाजी’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। खुसरो शाह को समाप्त करके उसने दिल्ली के सिंहासन पर अधिकार कर लिया तथा 8 सितंबर, 1320 ई. को सुल्तान बना। इसका एक नाम गाजी बेग तुगलक या गाजी तुगलक भी था, इसी कारण इतिहास में उसके उत्तराधिकारियों को भी ‘तुगलक’ पुकारा जाने लगा और उसका वंश तुगलक वंश कहलाया। ग्यासुद्दीन तुगलक ने 1320 ई. में नासिरुद्दीन खुसरव की हत्या करके तुगलक वंश की स्थापना की यह उस समय लाहौर के निकट दीपालपुर का गवर्नर था। गाजी मलिक का दूसरा नाम ग्यासुद्दीन तुगलक था गाजी का अर्थ होता है – “काफिरों का संहारक” (जो धर्म नहीं मानते उनकी हत्या करने वाला)। दिल्ली सल्तनत पर शासन करने वाला यह तीसरा वंश था। गयासुद्दीन तुगलक ने दिल्...