सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

नई दिल्ली में विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी मंत्रालय द्वारा "वन वीक वन लैब" अभियान का शुभारंभ किया गया।


नई दिल्ली में विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी मंत्रालय द्वारा "वन वीक वन लैब" अभियान का शुभारंभ किया गया।

इस अभियान की घोषणा CSIR लीडरशिप सम्मेलन में की गई।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में तकनीकी सफलताओं एवं नवाचारों को प्रदर्शित करना है जिससे देश में नवाचार संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।

साथ ही यह अभियान देश भर में फैले 37 वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) प्रयोगशालाओं एवं संस्थानों में से प्रत्येक में आयोजित किया जाएगा।

"वन वीक वन लैब" अभियान विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता, नवाचार और तकनीकी सफलता को प्रदर्शित करेगा। इस दौरान हर प्रयोगशाला में एक सप्ताह का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा जिसमें स्टार्टअप, छात्र और समाज के विभिन्न वर्ग शामिल होंगे।


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

बहावी आंदोलन 1820 से 1870

बहावी आंदोलन 1820 से 1870 के बीच हुआ हुआ आंदोलन क्षेत्र - पंजाब और बंगाल  आंदोलन के संस्थापक - सैयद अहमद बरेलवी थे। जिन पर अब्दुल वहाब का प्रभाव था तथा संत शाह वली उल्ला का महत्वपूर्ण प्रभाव नजर आता है। आंदोलन का उद्देश्य - धार्मिक उद्देश्य - आंदोलन का उद्देश्य इस्लाम धर्म में सुधार करना था अर्थात इस्लाम धर्म की बुराइयों को समाप्त कर मूल रूप में इस्लाम की स्थापना करना चाहते थे। राजनीतिक उद्देश्य - भारत दारुल हर्ब( काफिरों का देश ) है इसे इस्लाम हब ( इस्लाम देश ) में बदलना है। बंगाल तथा पंजाब से क्रमशः सिक्ख और अंग्रेजों का शासन निकाल फेंक मुसलमानों का शासन स्थापित करना चाहते थे। सैयद अहमद बरेलवी 1820 के बाद रुहेलखंड क्षेत्र में अपने विचारधारा का प्रचार प्रसार करने लगे। पटना में केंद्र स्थापित किया तथा कार्यकारी कार्यालय सीथना ( वर्तमान खैबर पख्तून ) बनाया गया जिसका संचालन पटना से होगा। 1830 में पेशावर पर कब्जा कर लिया गया इस समय पेशावर के शासक राजा रणजीत सिंह थे। 1831 में सैयद अहमद बरेलवी का सामना रणजीत सिंह की सीना से बालाकोट में हुआ जिसे बालाकोट युद्ध के नाम से जा...

लसोड़िया आंदोलन

लसोड़िया आंदोलन लसोड़िया आंदोलन” का क्षेत्र :- राजस्थान नेतृत्व करता :- (1).गोविंद गिरि, (2)सुर्जी भगत 19वीं सदी के उत्तरार्ध में सुर्जी भगत एवं गोविंद गिरि नामक समाज सुधारकों ने राजस्थान की मेवाड़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, सिरोही, पाली इत्यादि रियासतों में बसी भील जनजाति में सामाजिक सुधारों के प्रयास किए। गोविंद गिरि ने भीलों को संगठित करने के उद्देश्य से 1883 ई . में ‘सम्प सभा' की स्थापना की थी। गोविंद गिरि को लसोड़िया आंदोलन का प्रवर्तक माना जाता है। “मानगढ़ नरसंहार :- मानगढ़ नरसंहार की घटना राजस्थान से संबंधित है। मानगढ़ नरसंहार 17 नवम्बर वर्ष 1913 का है।मानगढ़ नरसंहार मै भील जनजाति के लगभग 1500 से अधिक लोग मारे गए थे इसे आदिवासी जलियाँवाला के नाम से जाना जाता है।  __________________________________________ महत्वपूर्ण प्रश्न :-   1. मेवाड़, बागड़ और पास के क्षेत्रों के भीलों में सामाजिक सुधार के िलए 'लसोड़िया आंदोलन' का सूत्रपात किसने किया? (a) भागीरथ माँझी (b) गोविंद गिरि (c) सिदो मूर्मू (d) सुरेंद्र साई उत्तर (b) गोविंद गिरि 2. “लसोड़िया आंदोलन” का क्षेत्र था - (...

खिलजी वंश

कैकूबाद कैकूबाद तुर्क वंश का दिल्ली का सुलतान था। वह गयासुद्दीन बलबन का पौत्र था जो उसकी मृत्यु के पश्चात् 1286 ई. में 18 वर्ष की अवस्था में दिल्ली का सुलतान बना। विलासी होने के कारण वह शीघ्र ही दरबार के षड्यंत्रों का शिकार हुआ। 1288 ई. में जलालुद्दीन खिलजी ने उसकी हत्या कर गद्दी पर अधिकार कर लिया। खिलजी वंश(1290 ई.- 1320 ई.) : इतिहासकार ‘निज़ामुद्दीन अहमद’ ने ख़िलजी को चंगेज़ ख़ाँ का दामाद और कुलीन ख़ाँ का वंशज, ‘बरनी’ ने उसे तुर्कों से अलग एवं ‘फ़खरुद्दीन’ ने ख़िलजियों को तुर्कों की 64 जातियों में से एक बताया है। फ़खरुद्दीन के मत का अधिकांश विद्वानों ने समर्थन किया है। ‘फरुखदीन लिखित “तारीख-ए-फखरूदीन मुबारकशाही’ के अनुसार खिलजी वंश के सुल्तानों के पूर्वज तुर्की थे। अफगानिस्तान के हेलमन्द नदी की घाटी के प्रदेश को ‘खलजी’ के नाम से पुकारा जाता था। जो जातियां उस प्रदेश में बस गई उन्हें खलजी पुकारा जाने लगा। जलालुद्दीन के वंशज 200 वर्षों से भी अधिक उस प्रदेश में रहे उनके रहन सहन, रीति-रिवाज अफगानों की भांति हो गये और भारत में उन्हें अफगान समझा जाने लगा परन्तु खिलजी वंश...