भारत का महान्यायवादी (Attorney General of India)
यह भारत सरकार का प्रथम विधि अधिकारी है,
अनुच्छेद 76 :-
अनुच्छेद 76(2) के अनुसार, महान्यायवादी भारत सरकार को कानूनी विषयों पर परामर्श देता है।
भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति :-
भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। एक प्रख्यात न्यायविद् (Distinguished Jurist) को भारत का राष्ट्रपति महान्यायवादी बना सकता है अर्थात् राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किए जाने वाले महान्यायवादी में वही योग्यताएं होनी चाहिए, जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के लिए आवश्यक हैं।
पुनर्नियुक्ति-
भारत के महान्यायवादी की अपने पद पर पुनर्नियुक्ति हो सकती है।
महान्यायवादी की सहायता के लिए अन्य विधि अधिकारी :-
अटॉर्नी जनरल के अतिरिक्त भारत सरकार के कानूनी सलाहकार के रूप में अन्य विधि अधिकारी
भी होते हैं। इन्हें सॉलिसिटर जनरल (महाधिवक्ता)कहा जाता है। ये अटॉर्नी जनरल को उसके दायित्यों के निर्वहन में सहायता प्रदान करते हैं।
महान्यायवादी के कार्यकाल :-
महान्यायवादी के कार्यकाल को निश्चित नहीं किया गया है। वह अपने पद पर राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यंत बना रहता है। परंतु लॉ ऑफिसर 1987 द्वारा कानून बनाकर भारत के महान्यायवादी का कार्यकाल सामान्यतः 3 वर्ष का होता है।
भारत के महान्यायवादी का अधिकार :-
भारत की किसी भी अदालत में महान्यायवादी को सुनवायी का अधिकार (right of audience) है।
संविधान के अनुच्छेद 88 में अभिकथित है कि "प्रत्येक मंत्री और भारत के महान्यायवादी को यह अधिकार होगा कि वह किसी भी सदन में, सदनों की संयुक्त बैठक में और संसद की किसी समिति में, जिस में उसका नाम सदस्य के रूप में दिया गया है, बोले और उसकी कार्य वाहियों में अन्यथा भाग ले, किंतु इस अनुच्छेद के आधार पर वह मत देने का हकदार नहीं होगा।
महान्यायवादी भारत सरकार के बिना परामर्श के यह कार्य नहीं कर सकता जैसे :-
* वह भारत सरकार के ख़िलाफ़ कोई सलाह या विश्लेषण नहीं कर सकता
* जिस मामले में उसे भारत सरकार की ओर से पेश होना है उस पर वह कोई टिप्पणी
नहीं कर सकता
* बिना भारत सरकार की अनुमित के वह किसी कम्पनी के निदेशक का पद ग्रहण
नहीं कर सकता
* वह बिना भारत सरकार की अनुमित के किसी आपराधिकक मामले में व्यक्ति का बचाव
नही कर सकता है।
* भारत के प्रथम महान्यायवादी-
एम .सी. सीतलवाड़ -1950-63( सबसे लंबा कार्यकाल)
1957- पद्म विभूषण पुरस्कार
* प्रथम विधि आयोग के अध्यक्ष-( आजादी के बाद )
एम.सी सीतलवाड़
* भारत के प्रथम महािधवक्ता -
चन्दर किशन दफ़्तरी जेड 1950-63 ( सबसे लंबा कार्यकाल )
1967- पद्म विभूषण पुरस्कार
द्वितीय AGI-1963-68
* भारत के वर्तमान महान्यायवादी-
आर वेंकटरमणि ( 2022- वर्तमान )
* भारत के वर्तमान महािधवक्ता-
तुषार मेहता (2018- वर्तमान)
* वर्तमान विधि आयोग के अध्यक्ष -
ऋतुराज अवस्थी
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महत्वपूर्ण प्रश्न :-
प्रश्न 1. भारत के महान्यायवादी (AttorneyGeneral) के विषय में निम्निलखित कथनों पर विचार कीजिए-
(1) वह भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है।
(2) उस में वही योग्यताएं होनी चाहिए, जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की होती हैं।
(3) उसे संसद के किसी भी एक सदन का सदस्य होना चाहिए।
(4) संसद द्वारा महाभियोग लगाकर उसे हटाया जा सकता है।
निम्न कूट सेउत्तर दीजिए-
(a) 1 और 2
(b) 1 और 3
(c) 2,3 और 4
(d) 3 और 4
उत्तर-(a)
राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किए जाने वाले महान्यायवादी में वही योग्यताएं होनी चाहिए, जो सर्वोच्च न्यायालय
के न्यायाधीश के लिए आवश्यक हैं। भारत का महान्यायवादी संसद का सदस्य नहीं होता है परंतु वह
किसी भी सदन में, सदनों की किसी संयुक्त बैठक में और संसद की किसी समिति में, जिस में उसका नाम
सदस्य के रूप में दिया गया है बोल सकता है, भाग ले सकता है, किंतु अपना मत नहीं देसकता (अनुच्छेद
88)। महान्यायवादी राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत अपना पद धारण करता है (अनुच्छेद 76(4)| अतः राष्ट्रपति
को उसे पदच्युत करनेका अधिकार है। इस प्रकार कथन (1) एवं (2) सही है, जबकि कथन (3) एवं (4)
गलत हैं।
प्रश्न 2 - सॉिलिसटर जनरल निम्न में से क्या होता है?
(a) सरकारी अधिवक्ता
(b) राष्ट्रपति का कानूनी अधिकारी
(c) महान्यायवादी का विधिक कार्यों मेंसहायक
(d) महान्यायवादी का वरिष्ठ विधि अधिकारी
उत्तर-(c)
अटॉर्नी जनरल के अतिरिक्त भारत सरकार के कानूनी सलाहकार के रूप में अन्य विधि अधिकारी
भी होते हैं। इन्हें सॉलिसिटर जनरल कहा जाता है। ये अटॉर्नी जनरल को उसके दायित्यों के निर्वहन
में सहायता प्रदान करते हैं।
प्रश्न 3 - भारत के महान्यायवादी (Attorney General of India) के संदर्भ में निम्निलखित कथनों का
मूल्याँकन करें -
I.महान्यायवादी सरकार का पूर्ण कालीन वकील (Fulltime Counsel) होता है
II.महान्यायवादी केंद्रीय कैबिनेट का सदस्य नहीं होता
निम्निलखित में से सही विकल्प का चयन करें -
(a)के वल कथन I सही है
(b)के वल कथन II सही है
(c)कथन I और II दोनों सही हैं
(d)उपरोक्त में से कोई सही नहीं है
Answer : (b)
Explanation : महान्यायवादी सरकार का पूर्ण कालीन वकील (Fulltime Counsel) नहीं
होता है। महान्यायवादी केंद्रीय कैबिनेट का सदस्य नहीं होता।
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